9th April 2025
वक्फ बिल 2025 संसद में पास हो गया है और अब मा. राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी है ,
जो अवश्यसंभव है।
वक्फ बिल का पुरज़ोर विरोध मुसलामानों का एक धड़ा कर रहा है
जिसे कुछ राजनीतिक दलों ने बरगलाया है।
संक्षेप में अगर समझें तो मूल बातें पहले समझना होगा -
1. वक्फ बोर्ड /वक्फ कॉउन्सिल धार्मिक बोर्ड या संस्था नहीं है , यह सबसे बड़ी गलतफहमी लोगों ने पाली हुई है।
2. वक्फ बोर्ड/वक्फ कॉउन्सिल को वक्फ की सम्पत्तियों के प्रबंधन का कार्य दिया गया था , उन्हें मुस्लिमों के धर्म सम्बन्धी किसी मामले से कोई मतलब नहीं !
3.वक्फ बोर्ड के पास जो ज़मीनें होनी चाहिये उनमे में मुख्य हैं मस्जिदें , मदरसे , दरगाहें आदि , लेकिन बात यहीं ख़त्म नहीं होती वक्फ के पास भरपूर ज़मीनें खेती की हैं ,दुकाने हैं ,कॉम्प्लेक्स हैं !
4. वक्फ को सम्पत्तियाँ दान से मिली हुई हैं और सबसे बड़ा हिस्सा दान से मिला है (वक्फ का हिंदी आशय दान ही होता है) वर्तमान कानून (जिसे बदला जाना है) के सेक्शन 40 से, जिसके तहत वक्फ जिसे कह दे कि यह ज़मीन उसके उपयोग में है इसलिए यह ज़मीन वक्फ की है तो उसे मान लिया जाता है कि वक्फ की सम्पत्ति है। इस तरीके से अधिकांश समपत्ति वक्फ के पास आई है।
5. “Wakf By User” नामक एक क्लॉज़ है जिसका मतलब है कि अगर किस ज़मीन/जगह का इस्तेमाल मस्जिद/मदरसा/सराय आदि उद्देश्यों के लिए हो रहा है तो वक्फ बोर्ड उसे वक्फ की सम्पति घोषित कर सकता है।
5. उपर्युक्त तरीके से ली गयी ज़मीन का विवाद भी वक्फ ट्रिब्यूनल ही सुनेगा और उसका फैसला इतना बंधनकारी होगा कि कोई और अदालत उस मामले को नहीं सुन सकती। हाई कोर्ट में ज्यादा से ज्यादा रिट याचिका लगाईं जा सकती है।
६. रिट याचिका का सिर्फ इतना स्कोप होता है कि किसी के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है तो हाई कोर्ट/सुप्रीम कोर्ट उसे अपने आर्डर से दुरुस्त करवाएगी , तो वक्फ बोर्ड ने जो ज़मीन किसी की भी अगर अपनी बता दी,उसके लिए सिविल केस चलाना पड़ेगा !
लेकिन वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ आप रिट याचिका तो लगा सकते हैं ,न कि सिविल केस यानी दीवानी मुक़दमा नहीं लगा सकते जिससे कि आपकी ज़मीन आपको वापस मिले या मुआवज़ा मिले। ज़मीन हड़पने का मामला रिट याचिका नहीं सुलझा सकती !
ऊपर बताए हुए कारणों से वक्फ कानून जो भारत में चला आ रहा था , वह एक तरह से घोटाला था ,
खुद सोचिये ज़मीन हड़पने की ऐसी शक्ति तो केंद्र सरकार या राज्य को भी नहीं दी गयी है, फिर वक्फ बोर्ड को कैसे ये शक्ति दी गयी किसने दी और क्यों दी?
1954 में वक़्फ़ का नया कानून आ गया , वक्फ समबन्धी कानून अंग्रेजों के ज़माने में भी बनाये गए, वक़्फ़ ही नहीं हिन्दू धर्म की सार्वजानिक सम्पत्तियों में भी दान के पैसों आदि के दुरूपयोग को रोकने के लिए अंग्रेजों ने अंततः कानून बनाया था ( वे इस पचड़े में पड़ना नहीं चाहते थे !
ऐतिहासिक रूप से देखें तो अंग्रेजों के ज़माने में अंग्रेज इस झंझट से दूर ही रहना चाहते थे
उनका मानना था कि उन्हें हिन्दुओं-मुस्लिमों आदि की धार्मिक सम्पत्तियों पर कोई नियंत्रण रखने की ज़रुरत नहीं !
1810 में बंगाल और 1817 में मद्रास में यह नियंत्रण कानून बने .
और सरकार ने काफी नियंत्रण अपने हाथों में ले लिए. हालाँकि 1839 में ईसाई मिशनरीज की शिकायत पर सरकार ने नियंत्रण थोड़ा ढीला किया और अंततः 1863 में एक अलग कानून बनाकर सरकार सीधे नियंत्रण से हट गयी और लोकल कमेटियों के हाथों कमान सौंप दी, जिनके फैसलों पर कोर्ट जाया जा सकता था !
इसके बाद कई बार नए कानून बनते रहे और अंततः आज़ादी के बाद भी 1923 का बना कानून चलता रहा
जिसे 1954 में फिर बदला गया और काफी हद तक मुस्लिमों के तुष्टिकरण के हिसाब से तोडा मरोड़ा गया।
1995 में लाया गया कानून तो पूरी तरह से तुष्टिकरण के लिए बना जिसमे वह क्लॉज़ आया कि वक्फ बोर्ड जिसे कह दे कि यह ज़मीन हमारे धार्मिक इस्तेमाल की है वह ज़मीन वलफ बोर्ड की !!
और ट्रिब्यूनल बनाकर कोर्ट जाने के रास्ते भी बंद कर दिए गए !!
2013 में फिर एक बार कानून में बदलाव किया गया और इस बार एक और सुविधा दे दी गयी कि अब ज़मीनें गैर मुस्लिम भी दान कर सकते हैं , वक़्फ़ बोर्ड किसी की भी ज़मीन वक्फ ट्रिब्यूनल के मार्फ़त अपनी घोषित कर सकते हैं जिसे कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती सिर्फ Writ लग सकती है और जैसा कि पहले बताया गया कि रिट में सिर्फ मौलिक अधिकारों के बारे में ही बात होती है ऐसे विवादों पर नहीं !!
2013 का कानून जब आया तब तक मुस्लिमों का एक बड़ा तबका इस खेल को समझ रहा था , यह जनतंत्र की जीत है कि मुस्लिमों में ही पिछड़े मुस्लिम (पसमंदा मुस्लिम) और बोहरा तथा शिया मुस्लिमों ने 2013 के बाद से इस वक्फ बॉर्ड के अधिकारों के विरुद्ध आवाज़ उठाना शुरू कर दिया है।
इस कानून का विरोध अब सिर्फ वही लोग कर रहे हैं जो वक्फ की इन सम्पत्तियों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और जो इसका किराया आदि हड़प रहे हैं वर्ना सोचिये कि जिस वक्फ बोर्ड (सभी राज्यों के) के पास 8.72 लाख सम्पत्तियाँ हैं ,
जिसके पास 9 लाख एकड़ ज़मीन है उसकी आय मात्र 166 करोड़ कैसे है , यानी प्रति संपत्ति मात्र 1904 /- प्रति वर्ष की ? अगर इस में से 3 लाख मस्जिद/दरगाह आदि अलग भी कर दें ,तो बाकी साढ़े पांच लाख सम्पत्तियों से मात्र 2900 /- प्रति वर्ष की आय होती है?
क्या यह सही लग रहा है? ये क्या मज़ाक है ?? पैसा कहाँ जा रहा है, गरीब मध्यम वर्गीय मुसलामानों के हित में इस्तेमाल करने की बजाए कहाँ जा रहा है पैसा ?
किसी की ज़मीन, किसी के खेत पर हाथ रख दें और कहें कि ये हमारे इस्तेमाल की है इसलिए वक्फ की हुई ?
क्या कोई तुक है इसमें ?
इस अधिकार की वजह से तमिलनाडु के एक पूरे गाँव पर वक्फ ने अपना दावा ठोक रखा है , केरल में भी ऐसा ही हुआ है, दिल्ली लुटियंस सहित हमारी संसद की ज़मीन तक को वक्फ अपनी ज़मीन बता चुका है !!
तमिलनाडु का पूरा मंदिर जो 14वीं शताब्दी से पहले का है उसे ये वक़्फ़ बोर्ड अपना बात रहा है !!
यह कानून ही नहीं बदला जाना चाहिए बल्कि हर राज्य के वक्फ बोर्ड और उसके पदाधिकारियों की पूरी जाँच सीबीआई से कराई जानी चाहिए , ये बड़ा घोटाला है और इसमें मुस्लिम ही नहीं कई हिन्दू ईसाई आदि नेता भी शामिल हैं, 1995 और 2013 के वक्फ कानून को जी तरह बनाया गया उससे अंधेरगर्दी का पता चलता है !
……………………………..
References
1. https://www.moneycontrol.com/news/india/humayun-s-tomb-maha-kumbh-land-and-more-bizarre-claims-by-waqf-third-largest-landowner-in-india-12982539.html
2. https://economictimes.indiatimes.com/news/india/waqf-through-the-ages-how-rs-1-lakh-crore-property-owner-board-acquires-land-and-what-the-govt-aims-to-change/articleshow/112365585.cms?from=mdr
3.https://timesofindia.indiatimes.com/india/in-10-big-numbers-waqf-amendment-bill-and-its-properties-in-india/articleshow/119907836.cms
4. https://www.opindia.com/2024/08/all-you-need-to-know-about-waqf-and-its-history-in-india/
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